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Monday, 15 August 2011

पहल

आज सुबह उठते ही बज पर आ गई.अजय झा जी के नये ब्लॉग-एक चिट्ठी-पर जा कर पढ़ा अच्छा लगा.उन्होंने एक अच्छी शुरुआत की है.
होता यह है की हम अपने ब्लॉग पर,सडक पर या जहाँ दो व्यक्ति मिले सरकार को,समाज को कोसने लगते हैं 'फलां' गलत हो रहा है,फलां गलत है.भ्रष्टाचार है.नेता चोर हैं'ऐसा है वैसा है'
भाई! इसके लिए जिम्मेदार कौन है?हम अपने आपको बुद्धिजीवी कहने वाले क्या कर रहे हैं?
मैं तो बुद्धिजीवी नही हूँ जी, किन्तु कुछ बताऊँ?
हर राज्य की राजधानी के सचिवालय में हर विभाग  का अपना 'पब्लिक ओपिनियन सेल' होता है.हमे किसी नियम में कोई कमी लगती है,परिवर्तन चाहते हैं तो वहां एक पत्र लिखिए.अपने सुझाव दीजिये.उसकी एक एक  कोपी अखबारों को भेजिए.एक एक कोपी स्थानीय जिलाधीश,एम.एल.ए, एम.पी.और सम्बंधित विभाग के पब्लिक ओपिनियम सेल में भेज दीजिये.
इन पब्लिक ओपिनियन सेल में राज्य के कोने कोने से आये हर पत्र का रिकोर्ड रखा जाता है.दमदार बिन्दुओ को चुन कर महीने में एक बार और कई दफा ज्यादा बार मीटिंग रखी जाती है.सम्बंधित विभाग के विशेषज्ञ इन बिन्दुओ पर विचार विमर्श करते हैं.बिंदु दमदार होने पर नियमो में परिवर्तन भी किया जाता है.
इसे यूँ समझा जा सकता है.मात्र एक उदाहरण दे रही हूँ अपना ही, जिससे आप जाने ,विश्वास करें कि आप भी ये सब कर सकते हैं. 
पढाने के अलावा पिछले बाईस तेईस साल से मैं मन को संतुष्टि देने वाले छोटे मोटे काम करती रहती हूँ.बच्चों का बीच में पढाई छोड़ देने का एक कारन पैसों की कमी भी रही है.जिसे दानदाताओ की मदद से मैंने उनकी पढ़ाई के बीच नही आने दिया. इसके लिए मैंने समाज कल्याण विभाग की भी मदद ली. अनाथ बच्चों के लिए बने नियम देख, पढ़ कर मुझे बहुत दुःख हुआ.
मैंने सी.एम.कार्यालय में फोन लगाया.अपनी बात फोन रिसीव करने वाले किसी माथुर साहब के सामने रखी....
अगले दिन ही वसुंधरा राजे सिंधिया जी फोन पर थी. बात हुई. उन्होंने सब लिख कर फेक्स करने को कहा.
कुछ बिंदु-
१. अनाथ -जिसके माता पिता की मृत्यु हो गई हो. गांवों में पिता की मृत्यु के बाद कई बार माँ बच्चे को छोड़ कर 'नाता' कर लेती है यानि दूसरा पति और बच्चे को दादा दादी या भगवान भरोसे छोड़ जाती है. रिकोर्ड के अनुसार माँ जिन्दा है किन्तु बच्चा अनाथ हो गया न? यही स्थिति माँ के मरने के बाद हो जाती है कई बार.
क्यों न 'अनाथ' की परिभाषा बदल दी जाये.
२. अनाथ बच्चों को समाज कल्याण विभाग की ओर से कई योजनाओं के तहत सहायता दिए जाने का प्रावधान है किन्तु ऐसे बच्चे का अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति का होना जरूरी है...........एक अच्छी योजना किन्तु उसमे भी जातिवाद ????
वो बच्चा बदकिस्मत है जो अनाथ है, उस पर उसका सवर्ण जाति या अन्य पिछड़ा वर्ग में जन्म लेना उसके और दुर्भाग्यशाली होने का कारण नही हो गया?..........

                           मात्र दस दिन बाद माथुरजी का फोन आया-''मेम! बधाई. आज का अखबार देखिये.''
 सचमुच नियम बदल चुके थे.
मानाकि आप जो चाहते हैं वो इतना जल्दी नही हो सका. तो भी निराश मत होइए. बार बार लिखिए.मेल कीजिये. सबका रिकोर्ड रखिये. परिवर्तन होगा. इतिहास के किसी पन्ने में इन परिवर्तनों के लिए किये गये आपके प्रयास या आपका नाम नही होगा किन्तु..........आपके मन में एक असीम शांति होगी की ....आप 'कुछ' कर रहे हैं....करके जा रहे हैं.
हाँ इस काम को 'टीम वर्क' का रूप दीजिये.आप थकेंगे नही.काम हल्का हो जाएगा.जिससे आप लम्बे समय तक इन्हें कर पायेंगे.
तो कदम बढायें? आइये.
 
 

indu puri


Reactions: 

25 comments:


Smart Indian - स्मार्ट इंडियन ने कहा
सही है, हिम्मत करने वालों की हार नहीं होती।

ललित शर्मा ने कहा
लोग सरकार के बनाये कायदे कानून ही नहीं जानते.
जागरूकता से बहुत से काम हो जाते हैं,
शुभकामनाएं

प्रवीण पाण्डेय ने कहा
बहुत सुन्दर प्रयास है यह, मेरा भी समर्थन है इसे।

दिगम्बर नासवा ने कहा
सतत प्रयास ज़रूर सफल होता है .... आपकी बाय से सहमत हूँ की कोशिश ज़रूर करनी चाहिए .... बूँद बूँद से घड़ा भर जाता है ...

राज भाटिय़ा ने कहा
बहुत सुंदर बात कही आप ने,आप ने बिलकुल सही लिखा, हमे जागरुक होना चाहिये, ओर कोसिश करनी चहिये, जरुर कामयाब होंगे

kase kahun? ने कहा
sunder prayas..

दिवाकर मणि ने कहा
बुआ, आपका यह कार्य वाकई बहुत प्रेरणास्पद है। हममें से अधिकांश लोग अपने ध्येय-पथ में थोड़ी सी असफलता से विचलित होकर रुक जाते हैं, लेकिन उन्हें नहीं पता होता कि सत्कार्य की राह में रोड़े बहुत होते हैं, और उन बाधाओं के पार ही लक्ष्य मौजूद होता है। बुआ, आपका यह संस्मरण उन लोगों को शायद प्रेरित करे, ऐसी आशा है...

manu ने कहा
kaarya bane n bane....
prayaas kabhi nahin chhodnaa chaahiye uanty indu...

सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi ने कहा
इसीलिए तो आपकी टीम का गुण्‍डा बनना चाहता हूं...

शायद कुछ बदलाव करने की उत्‍कंठा मन में लिए बैठा हूं...
एक पत्रकार के तौर पर जितना बदलाव करा सकता हूं... कराता हूं और जो नहीं करा सकता उसके लिए कर्मचारी और शिक्षक संगठनों को उकसाकर कराता हूं... कई बदलाव देखे, किए और संतुष्टि है। चिठ्ठी पत्री में कम ही विश्‍वास रहा है...

मीडिया अपने आप में सक्षम होती है सरकार के कान बजाने के लिए.. इसीलिए पिछले छह साल इसे इसी का हिस्‍सा बना हुआ बैठा हूं... अब सूचना के अधिकार के तहत कुछ सार्थक करने का प्रयास शुरू करूंगा... अभी तो दिमाग में बस प्‍लानिंग ही बना रहा हूं... :)

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा
सही सतत प्रयास बेकार नहीं जाता ...

Manoj K ने कहा
कोशिशें कामयाब होती हैं. आपका यह आलेख पढ़कर हिम्मत बंधी है. कई बार जनहित के कार्य छोटी मोटी रुकावटें के कारण अधूरे रह जाते हैं.

: केवल राम : ने कहा
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती और परमार्थ के लिए किये जाने वाले कार्य में तो ईश्वर भी साथ देता है .......!

पद्म सिंह ने कहा
कुछ जागरूकता की कमी और कुछ यह सोच कि "इस देश का कुछ नहीं हो सकता" दोनों ने सरकार और प्रशासन से संवादहीनता की स्थिति ला दी है... जहाँ नेताओं और अधिकारियों में कुर्सी और पोस्टिंग की सेटिंग उन्हें किसी सुधारात्मक विचार से अछूता रखती है, वहीँ जो सुविधाभोगी लोग हैं वो अपनी दुनिया में खुश हैं और इस पचड़े में नहीं पड़ना चाहते. अगर शासन प्रशासन और आम जनता के बीच अगर संवाद की सुलभ व्यवस्था हो, तो शायद तस्वीर कुछ और हो.

रश्मि प्रभा... ने कहा

Dr Varsha Singh ने कहा
सहमत हूँ मै भी आपसे !

Vivek Jain ने कहा
I extend my full support to you Indu je. You are really nice lady doing good job.
विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

Sawai SIingh Rajpurohit ने कहा
वैवाहिक वर्षगांठ की हार्दिक बधाई

सुशील बाकलीवाल ने कहा
सार्थक पहल ।
वैवाहिक वर्षगांठ की शुभकामनाओं सहित...

निर्मला कपिला ने कहा
अनुकरणीय प्रयास। आपको वैवाहिक वर्षगाँठ की हार्दिक बधाई।

Udan Tashtari ने कहा
निश्चित ही ऐसे सार्थक प्रयासों की जरुरत है. सिर्फ कोसते रहने से कुछ नहीं होगा. आवाज उठानी होगी. समाधान सुझाना होगा..
अच्छा लगा आपके प्रयासों को देख.
जज़्बा बनाये रखें और लोग प्रेरित होंगे.
वैवाहिक वर्षगाँठ की हार्दिक बधाई एवं मंगलकामनाएँ. मिठाई???

सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi ने कहा
दीदी, समीर भाई हमेशा अच्‍छे काम की बात करते हैं... यकीन न हो तो मनमोहन सिंह से पूछ लो... :)

शुभकामनाएं तो बज्‍ज पर दे चुके हैं पर यहां उन्‍होंने याद दिलाया है मिठाई...
तो मिठाई?

इंदु पुरी गोस्वामी ने कहा
@siddarth
मिठाई खाने से दांत खराब हो जाते हैं कहते हैं पेट में कीड़े भी पद जाते हैं.....फिर मैं ऐसा गन्दा काम क्यों करू?मिठाई खिलने का.
हा हा हा
सबको थेंक्स और....प्यार

जाट देवता (संदीप पवाँर) ने कहा
मेहनत हमेशा सफलता दिलाती है,