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Tuesday, 16 August 2011

कारवां मेरा

एक बड़ा ही खूबसूरत गाना अक्सर सुनती हूँ.आपने भी सुना होगा 'कहीं तो ये दिल कहीं मिल नही पाते,कहीं से निकल आये जन्मों के नाते '
ऐसा ही कुछ महसूस हुआ ब्लॉग की दुनिया में आने के बाद .
इससे पहले भी जीवन में कई अच्छे लोग आये किन्तु ब्लोगिंग से जो मुझे क्या मिला बताऊँ?
भावों को सबसे शेअर करने का एक खूबसूरत सशक्त मंच तो यह है ही.इसके अलावा ??????
सब कुछ एक साथ तो नही बता पाऊंगी.एक एक कर बताती जाऊंगी हा हा हा क्या करूं ?ऐसीच हूँ मैं तो
ब्लॉग शुरू होने के बाद ............. अक्सर एक शख्स मुझे मेल करते थे 'अज्ञात' के नाम से.वे मेरी रचनाओं के बारे में ज़िक्र करते थे .प्रोत्साहित करते.लिखते 'इस रचना को पढकर मैं बहुत रोया'.....
मैंने कई बार पूछा 'आप कौन है?अपने बारे में कुछ बताते क्यों नही?
पर वे एक ही जवाब देते 'मैंने आपको ऐसा कभी कुछ नही लिखा जिससे आपके सम्मान को ठेस पहुंचे,फिर इससे क्या फर्क पड़ता है कि मैं कौन हूँ?
'ओ.के. जी '
और ...........एक दिन बेटे ने आ कर बोला -'मम्मी! दिल्ली से कोई फोन है.आपसे बात करना चाहते हैं .'
...................................... अपने ब्लॉग और उनके ही लिखे शब्दों का ज़िक्र उनके मुंह से सुन कर मैं चौंकी.

''अज्ञात ...अज्ञात बोल रहे हैं आप?''
''जी अब तक 'अज्ञात' था किन्तु अब नही रहूँगा.मेरा नाम निर्मल गोयल है जी''- हा हा हा एक ठहाका मारते हुए उन्होंने जवाब दिया.
 'आप अपनी बेटी के रिश्ते के लिए लड़का ढूंढ रही हैं मैं उसी विषय में बार करना चाहता हूँ 'गोयल साहब ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा.
''मैं गोस्वामीजी को  आपसे हुई सब बात बता दूंगी.हमे समय दीजिये वैसे वो अभी छोटी ही है.हमने सोचा दो चार साल तो इसी में निकल जाते हैं इसलिए तलाश शुरू कर दी थी.इनके रिटायरमेंट से पहले चाहते तो हैं कि शादी हो जाए आगे जैसा इश्वर ने निश्चय किया है......''
ब्लॉग की दुनिया से मिला एक और शख्स पद्म सिंह श्रीनेत 'पद्मावली' और फेसबुक पर 'हल्ला बोल ' वाले.एक प्यारा सा इंसान जो धीरे इतना अपना हुआ कि इस जन्म में बेटा है अगले जन्म में मेरे पापा बनेगे.
मैंने पद्म को फोन लगाया.'पद्म! करोल बाग़ के कोई बिजनस पर्सन है.उनके के बेटा है.अप्पू के रिश्ते की बात कर रहे थे .मुझे उनकी 'डिटेल्स' चाहिए.'
पद्म ने न सिर्फ उनके कारोबार,परिवार और लडके के बारे में जानकारी भेजी बल्कि फ़ोटोज़ भी खिंच कर भेज दिए.
गोयल साहब करोल बाग़ के नामी गिरामी बिजनेसमेन तो हैं ही एक अच्छे व्यावहारिक व्यक्ति के रूप में दोनों पिता पुत्र को जाना और माना जाता है.
सब जान कर मैंने एक बार इनकार कर दिया.'सर! हम सर्विस क्लास है.ब्लॉग पढना उसका फेन होना अलग बात है और.......रिश्तेदारी अलग.इसलिए ......''
 ''जब आपका ब्लॉग पढ़ता था.तब सोचता था एक बार आपसे जरुर मिलूँगा.आज इश्वर ने मुझे मौका दिया है कि आपकी बेटी मेरे घर की बहु बने.....मना मत कीजिये.मेरी छोटी बहिन है आप.मैं जब भी वहां आऊँगा अपनी बहन के घर आऊँगा.सम्राट की मम्मी जब भी आएगी वो अपने बेटे के ससुराल नही अपनी ननद के घर आएगी..............''
और........................ मेरे ब्लॉग के एक प्रशंसक मेरे 'वीर जी' बन गये. बिना किसी दहेज के गोयल साहब अपनी अमानत अपने घर ले गये.अपूर्वा मेरी बेटी ...मेरे घर में सिंड्रेला थी ....मुझे नही मालूम था.आज वो एक उद्योगपति घराने की इकलौती बहु है ससुराल में सबकी लाडली
शायद ही किसी को ब्लोगिंग के बदले यह सब मिला हो.जो मुझे मिला.किसी परी-कथा सा लगता है सब कुछ मुझे.
और आपको???? .