Pages

Showing posts with label लड़की और वो माँ. Show all posts
Showing posts with label लड़की और वो माँ. Show all posts

Wednesday, 31 October 2012

उसकी मम्मी ..........



आज सुबह सुबह 'वो' क्यों याद आई.........नही मालूम.पर वो दृश्य ....वो  सुने गए एक एक शब्द मुझे ज्यों के त्यों याद है.
शायद  मेरे परिवार के  ही कोई   एडमिट थे हॉस्पिटल में. हम सब उनके पास थे. पास के वार्ड से किसी के बुरी तरह कराहने की आवाज़ आ रही थी. मन नही माना. लगा शायद किसी को मदद की जरूरत हो. जा कर देख लूं..................मैं उस वार्ड की तरफ बढ़ गई .

एक लड़की दरवाजे के एकदम पास वाले बेड पर पडी तडप रही थी.  कुछ बडबडा भी रही थी वो.  मैंने ध्यान से सुना- 'मम्मी! मुझे माफ कर दो. मेरे पास आओ. मम्मी! मम्मी!'

उसके मुंह से सल्फाज़ की तेज गंध आ रही थी.

वो बुरी  तरह अपने पैरों को बेड पर पटक रही थी. 'एडियाँ रगड रगडकर मरना ' पढ़ा और सुना था. आज अपनी आँखों के सामने देख रही थी. आत्म-हत्या का इरादा करने या रखने वाले एक बार उस दृश्य को अपनी आँखों से देखे तो शायद अपना इरादा बदल दे.

अचानक उसने तेज उबकाई ली. मैंने बेड के नीचे पड़े पोट को उसके मुंह से सटा दिया
.
मेरा हाथ पकडकर  वो तेज तेज रोने लगी. ' मेरी मम्मी को बुला दीजिए आंटी ! प्लीज़ मेरी मम्मी को बुला दीजिए. मैं अब ऐसा नही करूंगी कभी भी. मैंने गुस्से में आ कर 'गोलियाँ' खा ली. अब ऐसी गलती नही करूंगी. मुझे बचा लो आंटी! मैं मरना नही चाहती......मैं मरना नही चाहती.'

'कितनी 'गोलियाँ' खाई तुमने????'-मैंने पूछा.

' आठ'

'उफ़! ये क्या किया तुमने???   'स्टुपिड लड़की'  अपने  मुंह से नही निकाल पाई मैं .

हर आत्म-हत्या करने वाला शायद अंतिम क्षण में यह जरूर सोचता होगा. वो जीना चाहता है. कोई उसे बचा ले ...यह विचार भी उसके दिमाग में जरूर आता होगा.पर........शायद देर से सोचता है यह सब ......

खैर ........... मैं छटपटा उठी. कहाँ से लाऊं इसकी मम्मी को??? मैं तो जानती भी नही कि इसकी मम्मी कौन है??? मैं वार्ड से बाहर निकली. पूछा- 'इस बच्ची के साथ कौन है?? प्लीज़ मुझे बताइए...... वो अपनी मम्मी को बुला रही है.'

उस बच्ची के गुलाबी सलवार सूट की तरह माँ भी गुलाबी रंग की साड़ी में थी. वो वार्ड के बाहर खड़ी थी.

आँखों में आंसू भरे हुए थे. बेचैन  सी दिख रही थी. मैंने उनका हाथ पकड़ लिया और कहा-'उसने आठ गोलियाँ खाई है. इश्वर जाने क्या होगा उसका. पर  आप उसके पास खड़े रहिये प्लीज़'

' डॉक्टर साहब ने बता दिया है कि वो नही बचेगी मेडम ! मैं उसको तडपता  नही देख सकती. मर जाये वो. ये औलादे हैं??? बदला लेने के लिए दुश्मन पेट से पैदा हो जाते हैं. इसे मेरा लाड दुलार याद नही रहा. जरा सा डांट दिया तो जहर खा लिया.दो महीने बाद इसकी शादी है. दस दिन बाद एक्जाम होने वाले हैं.रात दिन 'कुंवर साहब' से बातें करती रहती थी फोन पर...........मैंने इसे समझाया. पढ़ ले फिर खूब बातें करना. 'वो' तो मेरा जमाई है.उन्हें क्या कहूँ.ये तो बेटी है.इसको तो समझा सकती हूँ.डांट सकती हूँ.किस लिए??? इसके भले के लिए. डांट कर कह दिया 'फोन रख.पढाई कर ले' इत्ती सी बात पर जहर खा लिया. कल ससुराल जाती तो क्या वहाँ कोई कुछ नही कहता है??? माँ ने कहा तो ये कर दिखाया.ससुराल जाती तो बेचारे उन लोगों को इसी तरह हत्यारा कर देती. मर रही है......मर जाये.  मुझे दुःख नही. ऐसी औलादों को जीना भी नही चाहिए. मनख योनी कितनी मुश्किल से मिलती है........... इसने सोचा??? जीवन में आगे यह क्या सुख दुःख का सामना करती??? आप बताओ.......... क्या माँ बाप एक शब्द भी अपने बच्चों को नही बोल सकते???? दुनिया को क्या जवाब दूंगी???? क्या मुंह दिखाउंगी अपने घर परिवार ,मुहल्ले वालों को???? बच्चे एक दिन में जवान नही हो जाते....... '' एक सांस में वो सब कुछ कह गई. आंसू टपकने लगे थे. पर एकदम सख्त हो गई थी वो.

 अचानक वो आगे बढ़ गई ,- 'उसके पापा' प्रतापगढ़ से आ गए हैं.

हम तीनों उस बच्ची के पलंग के पास खड़े हो गए. लड़की फुसफुसाई -'मम्मी माफ कर दे. पापा माफ कर दो. गलती हो गई.

' तू जा. तडप मत. हम नही देख सकते इस तरह तुझे....... हम मम्मी पापा ही होते तो हमारे कहे पर तू यह सब करती??? मैं माफ नही करूंगी तुझे. जा और भटक..... भटक.'

उस बच्ची की आँखें धीरे धीरे बंद होती चली गई........ उसकी मम्मी की प्रतिक्रिया पर मैं स्तब्ध थी.......पर शांत थी. कानों में आज भी उस औरत के शब्द गूँज रहे हैं ' चले ही जाना था .....क्या निहाल करती..........'

जाने वाले के कानों में कोई ये शब्द डाल दे  :( :(