Pages

Showing posts with label sansamaran -titu. Show all posts
Showing posts with label sansamaran -titu. Show all posts

Tuesday, 20 December 2011

एक शरारती चाँद



यह अभिषेक है यानि बड़ा बेटा टीटू है अपनी पत्नी प्रीटी के साथ.
बहुत अच्छा पिता भी ,पति भी ,
और लग कैसा रहा है सीधा सादा, भोला भोला सा .
नही. नही.अब भी शरारत टपक रही है इसके चेहरे से भी और हरकतों से भी.
फिर भी अब भी जब इसके बच्चों की शरारतें देखती हूँ ,  इसका बचपन याद आ जाता है 
मोहल्ले के कुत्ते और सूअर जब तेजी से दौड़ लगाने लगते थे ,लोग समझ जाते थे कि मैं बाल बच्चों सहित पदार्पण कर चुकी हूँ .सूअर के बच्चों को पकड़ने का बड़ा शौक था मेरे नौनिहालों को .
वैसे ये गुण 'बिरलों ' में ही पाया जाता है .
एक दिन मोहल्ले में जबर्दस्त धमाका हुआ ,पंछी फडफडा कर उड़ने लगे, हमने सोचा किसी के घर में पुत्र पधारे हैं इसलिए बंदूक -बाजी की जा रही है .तभी उपर की मंजिल से चचेरा भाई जो मेरे बच्चों से उम्र में छोटा है नीचे दौड़ता हुआ आया, हकलाते हुए बोला -'टीटू भैया ने बंदूक चला दी '
हम उपर की ओर भागे .
टीटू भाई साहब बोले  -''मैं तो डोक्टर साहब के टोनी मोनी पर निशाना लगा रहा था ....वो सामने छत पर, पर वो तो नीचे बैठ गये, ऋतू और चिकलिया ( मेरा चचेरा भाई,उम्र मुश्किल से चार साढ़े चार साल) तो डरते हैं मैंने कहा सामने खड़े हो जाओ दोनों, मैं निशाना लगता हूँ तो रोने लग गये,कितने डरपोक है ना मम्मी ? .''
हम कांप उठे  ,बाप रे .......  
हुआ ये बड़े  भाई साहब अपनी अलमारी को लोक करना भूल गये थे ,टीटू ने उनमे से कारतूस निकल लिए.सामने लटकी बंदूक उतारी, कारतूस डाला,पलंग पर बिस्तर  जमाये ,  बंदूक को टिकाया और ट्रिगर दबा दिया .झटके से खुद भी दूर जा गिरा , और निशाना चूक गया .
आज तो ये  सब  याद करके खूब हंसते हैं, पर.........
एक घटना और याद आ रही है .सुनेंगे ?   सुनाऊँ ? 
दिवाली के दिन की घटना है
टीटू 11-12 साल का रहा होगा तब .
टीटू अपने दोस्तों के साथ पटाखे छोड़ रहा था......... .
थोड़ी देर बाद मेरी भतीजी -अंजली- ने आ कर बताया -''बुआ! टीटू को पुलिस पकड़ कर ले गई ''
 मैंने पूछा -'' क्यों ले गई ''
अंजली ने बताया --'' बुआ ! टीटू के दोस्तों ने और उसने लेटर बॉक्स में रस्सी-बोम्ब डाल दिया,बॉक्स फट गया .किसी ने पुलिस को सुचना  दे दी ,सब भाग गये .इसको पुलिस ने पकड़ लिया ,पूछा तुम्हारे साथ और कौन कौन था ? तो कह दिया मैं अकेला ही था .''
अब हमने तो कभी थाना कचहरी का मुंह भी नही देखा था , 
इसके पापा तब विदेश गये हुए थे. इसलिए मुझे तो जाना ही था कोतवाली,
अतः  गई .
वहां पूरा खानदान पहले से इकट्ठा हो रहा था ,सबसे आखिरी में पहुँचने वाली मैं ही थी.
सीधी अंदर गई ,शहर कोतवाल से जा के बोला -'' बच्चे ने गलती की है ,रहने दीजिये अंदर ही ,हाथ मत लगाइयेगा,मार पीट नही प्लीज़. एक दो रात अंदर रहेगा तो ऐसी हरकत दोबारा नही करेगा  '' 
अब अभिषेक जी -मम्मी,सोरी मम्मी -करते रहे.
''वेरी गुड बेटा! तुम्हारे पापा यहाँ नही है,सात आठ महीने बाद आयेंगे ,तुमको चाहिए की मम्मी का ,अपने छोटे भाई बहन का ख़याल रखो,वो तो नही. ये जो कर रहे हो, बेस्ट कर रहे हो. तुम जैसे बेटे को 'यही' करना चाहिए '' कहते हुए मैं बाहर आ गई .
कजन को इशारा करके घर आ गई . वो उसी रात उसे छुड़ा लाया.
 मामला कैसे निबटाया वो तो मेरी आत्मा जानती है साम,दाम,...भेद  .
पर...........उसके बाद उसमे जबर्दस्त बदलाव आया ,थर्ड डिविजन, सप्लिमेंटरी से पास होने वाले टीटू ने पूने से एम्.बी.ए. ,एम्.पी.एम्. duet कोर्स फर्स्ट डिविजन पास किया और आज आदित्य बिरला ग्रुप में ऑफिसर है .
शायद उसे उस दिन मह्सूस  हुआ कि मेरी शरारतों ने मेरी मम्मी का दिल दुखाया है,उन्हें 'हर्ट' किया है .
शरारते उद्दंडता में बदले उस से पहले हमे उन पर अंकुश लगा देना चाहिए उसके लिए कोई भी तरीका अपनाना पड़े. प्यार या सख्ती सब जायज है.
वही टीटू आज मेरी आवाज   मात्र  सुन कर मेरे अंदर तक मुझे पढ़ लेता है.