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Monday, 29 August 2011

दस्तक



दस्तक सुनते ही दरवाजा खोल देते हैं हम, शायद कोई आया है....जाने कोई खास आया हो या.......????
पर कई बार सुस्ती,लापरवाही के कारण अनसुना कर देते हैं.मैंने भी यही किया. हा हा हा 
चार साल पहले एक दस्तक हुई.मैंने अनसुनी कर दी.बार बार हुई.....पता चला कोलेस्ट्रोल बढा हुआ है.
ओह! कई लोगों का बढा होता है आजकल मामूली बात है.लापरवाही की और मस्त जीती रही.

पहली गलती की .

घूमने जाती.साँस फूलती.......मामूली बात है.शरीर घूमने का आदि नही.ऐसा होना स्वाभाविक है. 

 दूसरी गलती की.

खाने पर कंट्रोल करना शुरू कर दिया.घूमना जारी रखा.सीने में दर्द रहने लगा .किसी को नही बताया घर में.ना डॉक्टर से मिलना जरूरी समझा.
तीसरी  गलती.

और एक सुबह घूमने निकली. घर तक आना मुश्किल हो गया.जीभ के नीचे आइसोड्रिल गोली रख कर इंतज़ार किया....दूसरी बार फिर गोली ली. पास ही पीठ की ओर एक्सरसाईज़ करते व्यक्ति को आवाज तक न दे पाई ...सोच रही थी कि वो मुझे घर तक पहुंचा दे या घर पर खबर दे दे. लोअर की पॉकेट में रखा मोबाइल भी स्विच-ऑफ था. निकालने की हिम्मत नही.

 गलती पर गलती .....
तभी...  एक आवाज आई -''गुड मोर्निंग ! आप ?? यहाँ??  क्या हुआ?? तबियत ठीक नही?''
''नही.मैं ठीक हूँ.जरा सा दर्द हो रहा है''
''चलिए आपको घर छोड़ दूँ ''
''नही.मैं एकदम ठीक हूँ चली जाऊंगी''- मैंने जवाब दिया.
वो फिर किसी देवदूत की तरह एक बार फिर मेरे सामने खड़े थे.
'' घूमने निकला था.सोचा भगवत कथा के बाद टेंट वगैरह हटा या नही.कोई सामान यहाँ रह तो नही गया,देखने आ गया था.दूर से देखा कोई बैठा है.पास चला आया . ये तो आप हैं''- देवदूत मुस्कराया.
'' अरे! मैं ठीक हूँ.आप जाइये.'-कितनी झूठी हूँ मैं.झूठ बोलने की कोई सीमा नही मेरी.
''
थोड़ी दूर साथ चलने के बाद मैंने उन्हें जबरन भेज दिया मैं घर आ गई. नेट चालु किया.पांच मिनट बाद बंद कर दिया.
गोस्वामीजी उठे. मैंने उन्हें 'हग' किया. ''घूम आई? जल्दी आ गई आज तो''
................चाय के दो घूँट लिए.कप ढक दिया.
''अरे! क्या हुआ?चाय क्यों नही ले रही हो?'
''कुछ नही हुआ.बस आज जरा.....थकान हो रही है.सो जाऊं?''-मैंने बोला. और सो गई.
आँखें खुली देखा.हाल में बेग ,अटेची तैयार पड़े थे.
''ड्रेस चेंज करनी हो तो कर लो.नही तो यूँ ही बैठ जाओ कार में .हम उदयपुर चल रहे हैं.''-फरमान जारी हुआ. हा हा हा 

डॉक्टर एक -''ये गोलियाँ लीजिए.पन्द्रह दिन बाद मिलिए.पांच किलोमीटर रोज घूमिये.'' अपना सामान समेटते हुए डॉक्टर ने कहा.वे उसी समय रिजाइन दे के होस्पिटल छोड़ कर जा रहे थे.

डॉक्टर-२. ''कुछ प्रोब्लम तो है.मेरी पोस्टिंग अभी अजमेर में है आप जब भी समय मिले.आ जाइये.एंजियोग्राफी कर लेंगे.बाद में देखेंगे क्या करना है''

डॉक्टर नम्बर तीन --' देखिये डायबिटिक होने के कारण चेस्ट की मशल्स जरा हार्ड हो गई है. उसी के कारण आपको पैन है और साँस में तकलीफ है.''
डॉक्टर नम्बर चार- 'आपको लंग्स में इन्फेक्शन हुआ है उसी के कारण चेस्ट में पैन और साँस लेने में तकलीफ होती है आपको'
सब अपने क्षेत्र के नामी ह्रदय रोग विशेषज्ञ. सार...ज्यादा कोई चिंताजनक बात नही.
घर लौट आये.कार पार्क करते हुए.फिर दर्द हुआ.किसी को नही बताया.पांच सीढी चढ़ी.साँस फूलने लगी...............
''डॉक्टर्स के कहने से क्या होता है? तकलीफ तो सामने दिख रही है.''-टीटू अपने पापा को बोल रहा था.साँसे और दर्द बेकाबू थे.
अमेरिकन होस्पिटल गये. एकदम युवक डॉक्टर.
'हे भगवान! ये क्या करेगा ? लड़का तो है.'-मैं सोच रही थी.
'''ब्लोकेज तो है कितना प्रतिशत है वो एंजियोग्राफी से पता लगाना है, करें? '' -डॉक्टर हरीश सनाढ्य ने बेटे और गोस्वामीजी से पूछा.
................दो ब्लोकेज कम थे.  पचास प्रतिशत से कम.  एक मैन आर्टरी पौने दो इंच एकदम पिचकी हुई थी.
शरीर ने कई बार दस्तक दी. मैंने नही सुनी. सजा तो मिलनी ही थी.  पर क्या पीड़ा मैंने अकेले भुगती? ऑपरेशन थियेटर से आई.सी.यु. में शिफ्ट करते समय एक मिनट के लिए गोस्वामीजी से मिलना हुआ और........चार दिन तक चश्मे के पीछे से झांकती उनकी आँखों में थरथराते आंसुओं ने मुझे सोने नही दिया.......
किसी के चले जाने से दुनिया नही रुक जाती किन्तु...... 'उन' दो में से एक व्यक्ति की जिंदगी ठहर जाती है....और कभी कभी पूरे परिवार का जीवन....एक साथ कई लोगों का.
उपर मेरे भतीजे अविनाश का फोटो है.उम्र छब्बीस साल.एम.बी.ए. फाइनल यीअर में था.पूना में हार्ट अटेक हुआ.किन्तु....चित्तोड़ के डॉक्टर्स ने कहा-' नही.कुछ नही हुआ है.सारी रिपोर्ट्स नोर्मल है.पूना के डॉक्टर्स ने आपको गलत बताया है.'
घर के सब निश्चिन्त हो गये. डॉक्टर्स पर हर कोई यकीन करता है. हमने भी किया.
मम्मी पापा,पत्नी ...सब चिंता करेंगे यही सोच उसने भी अपनी तकलीफ नही बताई और मात्र छ महीने बाद.... सबके सामने अपने फूफा जी के हाथों में उदयपुर के एक हार्ट हॉस्पिटल में वो  ...... कभी न जागने के लिए हमेशा के लिए सो गया.और जीते जी मर गये भैया,भाभी,अमिता और कई लोग...
शरीर की दस्तक सुनिए प्लीज़. वो कई बार दस्तक देता है. चिल्ला चिल्ला कर कहता है किन्तु हम नही सुनते.....
मैने, हमने मूर्खता की बार बार... आप लोग समझदार है.  है ना?????