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Monday, 19 September 2011

[उद्धवजी] New comment on आरती.

indu puri has left a new comment on your post "आरती":

प्रिय कैलाश जी
नमस्कार
मुझे बेहद ख़ुशी है कि आपका कमेन्ट सही मायने में कमेन्ट है जो रचना को गंभीरता से पढ़ा,समझा गया बतला रहा है.एक लेखक के लिए इससे बद्दी ख़ुशी की कोई बात नही होती कि उसने जो लिखा उसे कोई गंभीरता से ले रहा है.इस कमेन्ट में आपके विचार हैं आपका व्यक्तित्त्व है.थेंक्स.
नायक मानसिक नपुंसक नही.अपने सिद्धांतों,आदर्शों की बलिवेदी पर चढा व्यक्ति है.उसने 'आरती' से अपने भाई की शादी के लिए दबाव नही डाला.फैसला उस पर ही छोड़ा था.नायिका के पति की नपुंसकता का उसे पूर्व में पता होता तो नायिका के बताने पर 'उस पर बिजली नही गिरती'.वो चौंकता नही.
इस कहानी की रचना ही मैंने इसीलिए की क्योंकि मेरे लिए भी नायक नायिका सामान्य इंसान नही है.मैंने प्रेम के उद्दात रूप को देखा.देह से परे उनके प्रेम में एक दुसरे का सुख परिवार की ख़ुशी ज्यादा महत्त्वपूर्ण थी.आज का नायक नायिका को भगा ले जाता.नायिका अपने भविष्य के लिए माता पिता ,खानदान को एक तरफ कर देती.
पर.....क्या आप ऐसा बेटा नही चाहेंगे? या ऐसी बेटी जिसने अपने परिवार,नायक सबकी ख़ुशी के आगे अपना सब त्याग दिया.
मैं तो चाहूंगी. यूँ.... उस पोस्ट के साथ दिए कमेंट्स में एक कमेन्ट कहानी के नायक का भी है 'भटकती आत्मा' के नाम से .पढियेगा.
थेंक्स अगेन
इंदु

Posted by indu puri to उद्धवजी at 19 September 2011 08:08