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Wednesday, 18 January 2012

खुली आँखों का एक सपना

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कहते हैं सपनो की दुनिया बड़ी खूबसूरत होती है ,सपने जो नींद में आते है . सपने जो खुली आँखों से देखे जाते हैं.
खुली आँखों से देखे सपने जीवन में आगे बढने को प्रेरित करते हैं,उस ओर लगने वाली मेहनत,प्रयास ,इच्छा शक्ति सौ प्रतिशत है तो वो पूरे भी हो जाते हैं.खुली आँखों के सपने सपने नही भविष्य का ब्ल्यू प्रिंट है. 
ये जिंदगी को खूबसूरत बना देते हैं,कैसे ?
 चलिए, आज आपको ऐसे ही एक खुली आँखों से  देखे सपने का किस्सा सुनती हूँ .                           
बस इसके लिए कल्पना शक्ति की जरूरत थी इसे  खूबसूरत बनाने के लिए और वो इश्वर ने इंदु को खूब दी है,    तो...............
मेरे स्टाफ में सुविधि,गरिमा ,ज्योत्स्ना तीन टीचर्स है,जो मुझसे बहुत प्यार करती है,इतना कि अक्सर कहती है अगले जन्म में आपके पेट से ही जन्म लेना है ,ऐसे ही मेरे एक परिचित ,बहुत प्यारे पारिवारिक मित्र , नही, मित्र नही लिखूंगी परिवार के सदस्य है .हम सभी में इतना खूबसूरत रिश्ता है कि मुझे नही मालूम इसे कैसे परिभाषित  करना चाहिए ?
ये समझ लीजिये एक दुसरे के दुःख ,परेशानी को हम आवाज सुन कर ही भांप लेते है,मदद के लिए कहने की  जरूरत नही पडती.
किसी चट्टान की तरह 'एंजिल' हमारे आगे आ खड़े होते हैं ,दुःख परेशानियों को पहले उनसे टकराना होता है .
'वो' भी चाहते हैं कि मैं अगले जन्म में उनकी 'माँ' बनूँ . 
अब तीन, नही नही, एक और है सुनीता उसने भी वचन ले रखा है .रही मेरी बेटी अपूर्वा उर्फ़ अभिव्यक्ति उसे तो मैं हर जन्म में पाना चाहती हूँ और अगली बार तो अपने ही गर्भ से जन्म देना चाहती हूँ ,तो भई निश्चय हुआ कि अगले जन्म में सारे नियम कायदे तोड़  कर इंदु आधा दर्जन बच्चों की माँ बनेगी ही.
दोस्ती ,प्यार यही पर्याप्त नही होते आपकी इस दुनिया में जीने के लिए.
 इनका एक नाम ,एक रिश्ता होना भी जरुरी है ना ?
खाली समय में इस बात को लेके हम अपनी अपनी कल्पना के घोड़े भी दोडाते रहते हैं ,कैसे ? देखिये छोटी सी झलक ......
पांच बेटिया एक बेटा 
बेटा और एक बेटी गरिमा - ट्विन्स - सबसे छोटे है , बेटी आधा मिनट पहले जन्मी है यानि 'लल्ला' की दीदी. 
मैं-'' एक झापट लगाऊंगी  अभी,  एक घंटे से रोये जा रहा है,  घर का काम भी नही करूँ ?''
ज्योत्स्ना --' माँ ! क्यों चिल्ला रही हो लल्ला पर? लाओ मुझे दो , अभी चुप हो जायेगा अपनी दीदी के गोदी में आते ही मेला लाजा भैया ''
मैं--' रहने दे ,रख लूंगी मैं, काम भी कर लूंगी और  रख भी लूंगी इसे, हाथ मत लगा .
काम करते तो मौत आती है तुम चारो छोरियों को .   अब चुप होएगा या  लगाऊँ  दो चार ?''  
सुविधि -'' मुझे दे दो माँ, मैं चुप कराती हूँ, रो रो कर कैसा लाल हो गया है ?''
मैं -' हट जा ,कोई जरूरत नही लेने की ,मैंने पैदा किया है तो रख भी सकती हूँ ,तुम्हारे भरोसे पैदा नही किया था इसे .तेरी दादी ,पोता चाहिए .खुद तो गई...उपर'
सुविधि--'' इम्तिहान देने गई थी हम चारों ,बस इतनी ही देर संभालना पड़ा इसे आपको ,जिसमे तूफ़ान खड़ा कर दिया . दो, लाओ दो इसे ''  
मैं-''नही दूँगी ,तु तो पिछले जन्म में भी बहुत जलती थी इससे ,मेरा बात करना तक नही सुहाता था  तुझे .
लाड़ दिखा रही है , दूर हट. होती कौन है तु इसे मेरी गोदी से लेने वाली?''   गुस्सा कम होने का नाम नही ले रहा इंदु का .
सुविधि एकदम शांत हो गई आवाज की तीक्षनता को ममता ने दबा दिया - ''मैं कहने को बड़ी बहन हूँ इसकी, पर छोटा   भाई कब  बेटा बन जाता है उसे भी मालूम नही पड़ता ?'' 
गरिमा -'' माँ! तु मेले छोते छे भैया को क्यों मालती है ? तु मुझे माल ले ,इछ्को मत माल ''
वो एक भाव शुन्य लडकी ,विज्ञानं की टीचर ,एकदम रफ टफ सी गरिमा बोले जा रही थी -'' इछ्को मत माल , इसको मत मार, इसको  मत मार माँ ,मेरे से नही देखा जाता माँ''  और..........................
मैंने नही, सबने अपने अगले जन्म को देखा   उस क्षण. 
मैं -माँ- मेरी पांचो बेटिया और  मेरे काँधे से लगा मेरा लल्ला ( जो सुविधि की बेटी  है )  हम सभी की आँखों से आंसू बह रहे थे ,गरिमा फूट फूट कर रोये जा रही थी अब भी .
मैं लिख रही हूँ ,मेरे लिखे शब्द धुंधला रहे हैं .............
क्या कहेंगे इसे आप ? 
खुली आँखों का सपना ?
कल्पनाशक्ति का चमत्कार ?
        या  
प्यार का एक उद्दात रूप ?
जिसे महसूस किया जा सकता है या जिया जा सकता है, ये हम पर है.